पंडरिया। नगर में शराब के अत्यधिक सेवन के कारण सार्वजनिक स्थानों पर नशे में धुत लोगों के पड़े रहने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग शराब पीने के बाद इस कदर नशे में हो जाते हैं कि वे अपने घर तक भी नहीं पहुँच पाते और रास्ते में ही सड़क किनारे या बीच सड़क पर गिर जाते हैं। ऐसी स्थिति न केवल उनके जीवन के लिए खतरा बनती है, बल्कि अन्य राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम और रात के समय ऐसे दृश्य आम हो गए हैं। नशे में बेसुध पड़े लोगों के कारण कई बार दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। समय पर मदद नहीं मिलने पर उनकी जान पर भी बन सकती है।
नगरवासियों का कहना है कि एक ओर शासन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में नई शराब दुकानों के संचालन एवं विस्तार को अनुमति दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशा मुक्ति के लिए जनजागरूकता अभियान, सलाह और विज्ञापनों पर भी लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि यदि नशे से समाज को बचाने के लिए लगातार अभियान चलाने पड़ रहे हैं, तो शराब की बढ़ती उपलब्धता और उसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए भी समान गंभीरता से प्रभावी नीति और ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल शराब की बिक्री से राजस्व प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन की जिम्मेदारी यह भी है कि शराब दुकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, नियमित पुलिस गश्त हो, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाए।
नगरवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर नशे में पड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो, शराब दुकानों के आसपास प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा नशे की समस्या को रोकने के लिए राजस्व के साथ-साथ जनहित को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और सामाजिक दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।

